>बिजली उत्पादन के मामले में आगामी 2012 तक हरियाणा आत्मनिर्भर प्रदेश होगा

29 अप्रैल

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सिरसा, 29 अप्रैल।
     बिजली उत्पादन के मामले में आगामी 2012 तक हरियाणा  आत्मनिर्भर प्रदेश होगा । वर्तमान सरकार के 6 वर्ष के कार्यकाल में भी हरियाणा में 3230 मैगावाट बिजली उत्पादन किया गया, जो पिछले 40 वर्षो में किए गए बिजली उत्पादन से दोगुणा से भी अधिक है।
    यह बात प्रदेश के बिजली मंत्री श्री महेन्द्र प्रताप सिंह ने आज स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह में
पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए कही। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार से पहले 40 वर्षो में हरियाणा में बिजली का कुल उत्पादन 1587 मैगावाट हुआ, जबकि गत 6 वर्षो में बिजली उत्पादन 3230 मैगावाट हुआ। इस समय राज्य में पारम्परिक एवं गैर पारम्परिक स्रोतो से 5700 मैगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। भविष्य में बिजली उत्पादन क्षेत्र में सरकार की कई योजनाएं हैं, जिससे प्रदेश बिजली उत्पादन के मामले में शीघ्र ही आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि आवश्यकता से अधिक बिजली पैदा करने वाला प्रदेश होगा। राज्य में इस समय रात के समय चार हजार मैगावाट के लगभग बिजली की जरूरत पड़ती है, दिन के समय बिजली की जरूरत कम होती है। आज प्रदेश में बिना किसी बाहरी खरीद के लोगों को जरूरत अनुसार बिजली मुहैया करवाई जा रही है।  प्रदेश की कुल बिजली का 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र में दिया जा रहा है।
    उन्होंने बताया कि  मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुडडा ने प्रदेश में पांच हजार मैगावाट बिजली पैदा करने की योजनाएं शुरू करवाई जिनमें झाड़ली में 1500 मैगावाट का इन्दिरा गांधी सुपर पावर प्लांट, हिसार के खेदड़ में 1200 मैगावाट का कोयला आधारित सयंत्र शामिल है। जिनके निर्माण पर 12 हजार 229 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। इन प्लांटों की ईकाईयों ने कार्य करना शुरू कर दिया है। इसी प्रकार से झज्जर के खानपुर गांव में 1320 की कोयला आधारित सयंत्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है जिस पर 6600 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। इसके साथ-साथ फतेहाबाद जिला के गोरखपुर गंाव में 2800 मैगावाट के परमाणु बिजली सयंत्र के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पारम्परिक स्त्रोतों के साथ-साथ हाईडल और अक्षय उर्जा व्यवस्था से भी अधिक से अधिक बिजली पैदा करने क ी योजनाएं तैयार की गई हैं।
    श्री महेन्द्र प्रताप ने कहा कि बिजली आज देश व प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। इसी को मध्यनजर रखते हुए राज्य सरकार ने बिजली उत्पादन पर विशेष जोर दिया है। एक प्रश्र के जवाब में उन्होंने तकनीकी शिक्षा बारे बताया कि 1966 में प्रदेश में जहां केवल मात्र 6 तकनीकी शिक्षण संस्थान थे जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बढ़कर 596 हो गए है। इन तकनीकी संस्थानों में 155 इंजीनियरिंग कालेज तथा 163 बहुतकनीकी संस्थान हैं। इसके अलावा अन्य कई डिग्री व डिप्लोमा स्तर के संस्थान हैं। इन तकनीकी संस्थानों में 490 निजि क्षेत्र के और 62 सरकारी क्षेत्र के संस्थान शामिल हैं। तकनीकी शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश में पहले मात्र दो अंकों की राशि का बजट रखा जाता था इस वर्ष तकनीकी शिक्षा के लिए 171 करोड़ रुपए का योजनागत बजट रखा गया है।
     इस अवसर पर उनके साथ पूर्व विधायक मनीराम केहरवाला, प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधि होशियारी लाल शर्मा व अन्य स्थानीय नेतागण थे।

सिरसा, 29 अप्रैल : हरियाणा के बिजली एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री महेन्द्र प्रताप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों को समयबद्ध  लागू करें ताकि इन योजनाओं व कार्यक्रमों का आमजन को लाभ मिल सके।

    श्री महेन्द्र प्रताप स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह में  अपने प्रथम दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को औपचारिक रूप से सम्बोधित कर रहे थे। 
    उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास में सरकार के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों  की महत्वपूर्ण
भूमिक ा होती है। सरकार के स्तर पर प्रदेश की जनता के लिए विकासोन्मुखी एवं कल्याणकारी योजनाएं तैयार की जाती हैं जिन्हें प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा क्रियान्वयन करना होता है। इसलिए इस प्रक्रिया में अधिकारियों की अहम भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने कर्तव्य को मेंहनत, ईमानदारी निष्ठा एवं पूरी पारदर्शिता से निभाएं तो निश्चित रूप से सरकार और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और ज्यादा प्रगाढ़ होगा।
    श्री महेन्द्र प्रताप ने कहा कि वर्तमान सरकार की जनकल्याणकारी और विकासकारी नीतियों की बदौलत आज हरियाणा प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में एक नम्बर का प्रदेश बन चुका है। प्रदेश की प्रगति को देखते हुए व्यापारियों व पूंजीनिवेशक हरियाणा की ओर आकर्षित हुए हैं। वर्तमान सरकार के 6 वर्ष के कार्यकाल में राज्य में 53 हजार करोड़ रुपए का पूंजीनिवेश हो चुका है जिसमें से 9400 करोड़ निवेश विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से हुआ है। उन्होंने बैठक में बिजली वितरण की व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बिजाई के समय कृषि क्षेत्र में अधिक से अधिक बिजली देने का प्रयास करें। इसके साथ-साथ घरेलू क्षेत्र में भी पर्याप्त मात्रा में बिजली सप्लाई करें। यदि शैडयूल के मुताबिक थोड़ा बहुत कट करना पड़े तो रात की बजाय दिन के समय में बिजली कट करें। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम को मध्यनजर रखते हुए सरकार के स्तर पर बिजली आपूर्ति के पर्याप्त प्रबन्ध किए गए हैं।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच हजार मैगावाट बिजली पैदा करने की योजनाएं शुरू करवाई गई है जिनमें झाड़ली में 1500 मैगावाट का इन्दिरा गांधी सुपर पावर प्लांट, हिसार के खेदड़ में 1200 मैगावाट का कोयला आधारित सयंत्र शामिल है। जिनके निर्माण पर 12 हजार 229 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। इसी प्रकार से झज्जर के खानपुर गांव में 1320 की कोयला आधारित सयंत्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है जिस पर 6600 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। इसके साथ-साथ फतेहाबाद जिला के गोरखपुर गंाव में 2800 मैगावाट के परमाणु बिजली सयंत्र के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पारम्परिक स्त्रोतों के साथ-साथ हाईडल और अक्षय उर्जा व्यवस्था से भी अधिक से अधिक बिजली पैदा करने क ी योजनाएं तैयार की गई हैं।
    बिजली एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि विकास के लिए आज हरियाणा में किसी प्रकार से भी धन की कमी नहीं है। वर्तमान सरकार से पूर्व 2004-05 में राज्य का योजनागत बजट जहां मात्र 2200 करोड़ रुपए था ।  अब वर्तमान सरकार में 2011-12 में वार्षिक योजनागत खर्च के लिए 20 हजार 358 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार के विकासोन्मुखी बजट से प्रदेश के हर क्षेत्र में प्रगति के रास्ते खुलेंगे और हरियाणा हर क्षेत्र में देश का एक नम्बर का प्रदेश होगा। इससे पूर्व उपमण्डल अधिकारी ना0 सिरसा श्री रोशनलाल ने बिजली मंत्री श्री महेन्द्र प्रताप का प्रशासन की तरफ से औपचारिक स्वागत किया। इस बैठक में पूर्व विधायक श्री मनीराम केहरवाला ने भी बिजली मंत्री का स्वागत किया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि श्री होशियारी लाल शर्मा व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। 

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