>वरिष्ठ साहित्यकार डा राधे श्याम शुक्ल के दो काव्य संग्रहों का लोकार्पण

18 अप्रैल

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हिसार गुरू  जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डा एम एल रंगा ने वरिष्ठ साहित्यकार डा राधे श्याम शुक्ल के द्वारा रचित दो काव्य संग्रहों त्रिकाल के गीत व जरा सी प्यास रहने दे का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो आर एस जागलान ने की। इस अवसर पर प्रो एम एस तुरान, प्रो एस सी कुण्डू, प्रो बी के पूनिया, प्रो कुलदीप बंसल, प्रो आर मलहोत्रा, प्रो मनोज दयाल, श्री आर के यादव, श्री बी सी कुण्डू, श्री प्रकाश अरोड़ा विभिन्न विभागों के अधिष्ठाता, विभागध्यक्ष व शहर के जाने माने साहित्यकारों में डा मधुसूदन पाटिल, प्रो सी एल डोगरा, श्री महेन्द्र जैन, श्री मदन गोपाल शास्त्री, श्री कमलेश भारती, श्री राजेश हिंदुस्तानी, श्री मनोज छाबड़ा आज उपस्थित थे। पुस्तक की समीक्षा प्रो कुमार रवीन्द्र और श्री असीम शुक्ल ने की। इस अवसर पर डा राधेश्याम शुक्ल ने अपनी पुस्तकों से कुछ गीत व गजलें प्रस्तुत की।
कुलपति डा एम एल रंगा ने इस अवसर पर कहा कि कविता सरल भाषा में एक कठिन चीज को प्रस्तुत करने की कला है और इतिहास में समय समय पर यह देखा गया है कि कवियों ने कविता के माध्यम से समाज में चल रही गतिविधियों को नई उडान दी है और समाज को प्रगतिशील बनाने के लिए प्रेरणा और विचार दिए है। उन्होने कहा कि कवियों को समाज में हो रहे सुखद भावनाओं को भी अपने लेखन में लाना चाहिए
कुलसचिव प्रो आर एस जागलान ने इस अवसर पर कहा कि कवि समाज में दीपक का काम करता है। उन्होने कहा कि कविता  लिखित भाषा में एक आईना है जिसमें समाज की भावनाओं को कवि अपने शब्दों में मोतियों की तरह पिरो कर समाज को प्रस्तुत करता है।
डा राधे श्याम शुक्ल ने कहा कि ज्यो-ज्यों मनुष्य मशीनी होता जाएगा कवियों की भूमिका और भी बढती जाएगी। जैसे कि रेगिस्तान में मीठे पानी की झील की जरूरत हमेशा हमेशा बनी रहेगी। उन्होने अपने गीत में कहा कि – पछुवाँ की बयार में कुछ इस तरह बहे, हम न शहर के रहे, न गांव के रहे। क्या सनक चढ़ी कि हम जमीन छोड़कर आसमान के लिए बहुत विकल हुए। एक चकाचौंध को प्रकाश मानकर, हम जगर-मगर हुए, चहल-पहल हुए। चन्दनों की खोज सर्पदंश बन गई, हम न धूप के रहे न छांव के रहे।
फोटो कैप्शन:-
फोटो-1
गुरू  जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डा एम एल रंगा वरिष्ठ साहित्यकार डा राधे श्याम शुक्ल के द्वारा रचित दो काव्य संग्रहों त्रिकाल के गीत व जरा सी प्यास रहने दे का लोकार्पण करते हुए। साथ में  कुलसचिव प्रो आर एस जागलान, डा राधे श्याम शुक्ल व अन्य।
फोटो-2
गुरू  जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार में वरिष्ठ साहित्यकार डा राधे श्याम शुक्ल अपने काव्य संग्रहों में से गजलें प्रस्तुत करते हुए।

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