>डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने ऐसे भारत का सपना देखा था जहां किसी तरह का भेदभाव न हो

14 अप्रैल

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सिरसा। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने धर्म, समाज, राजनीति और अर्थ के धरातल पर सामाजिक क्रांति से साक्षात्कार कराने की सार्थक कोशिश की थी और ऐसे भारत का सपना देखा था जहां किसी तरह का भेदभाव न हो। यह बात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि होशियारी लाल शर्मा ने आज बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 12१वीं जयंती पर अपने कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में कही। इस मौके पर मा. राजकुमार वर्मा, हरीश सोनी, संत लाल गुंबर, संजय शर्मा, संत सैनी, तिलक चंदेल, भोला जैन, वेद सैनी, सुखदेव बाजीगर, युसूफ खान व जाफर शरीफ सहित अनेक कार्यकर्ता मौजदू थे।
    उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव को मिटाकर देश को एकसूत्र में बांधने का उन्होंने प्रयास किया था। उनके कारण ही देश को धर्म निरपेक्ष संविधान मिला। देशवासी उनके प्रति कृतज्ञ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान की रचना में महान योगदान देने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर एक भारतीय विधिवेत्ता होने के साथ ही बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे। एक गरीब अस्पृश्य परिवार में जन्में बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना सारा जीवन हिंदू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली, और भारतीय समाज में सर्वव्यापित जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया। उन्हें बौद्ध महाशक्तियों के दलित आंदोलन को प्रारंभ करने का श्रेय भी जाता है।

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